सूर्य नूतन वर्ष का

सूर्य नूतन वर्ष का बस है गली को मोड़ पर ही
आओ अगवानी करे, ले पृष्ठ कोरे साथ मन के

वेदना के पल गुजरते वर्ष ने जितने दिए थे
हम उन्हें इतिहास की अलमारियों में बंद कर दे
नैन में अटकी हुई है बदलियां निचुड़ी हुई जो
अलगनी के छोर पर उनको उठाकर आज धर दे

अर्थहीना शबडी की अब तोड़ कर पारंपरिता
मन्त्र  रच ले कुछ नए आतिथ्यके लेशुभ्र मनके


स्वप्न टूटे आस बिखरी जो सहेजी है बरस भर
आज इसका आकलन हम एक पल को और कर ले
पंख बिन चाहा भरे भुजपाश में अम्बर समूचा
आज तो परवाज़ की क्षमताओ पर कुछ गौर कर ले

जांच ले हम पात्रता अपनी, कसौटी पर परख कर
ताकि अब बिखरें नहीं संवरें नयन जो स्वप्न बन के

कामना झरती रही बिन भावनाओं की छुअन के
और घिरता रह गया था बांह  में कोहरा घना हो
इस बरस हर शब्द गूंजे होंठ की चढ़ बांसुरी पर
ये सुनिश्चित कर रखे वह प्रीतिमय रस से सना हो

सूर्य नूतन वर्ष का जो ला रहा सन्देश पढ़ ले
और पल सुरभित करे हम वर्ष को मधुमास कर के

Comments

Udan Tashtari said…
सूर्य नूतन वर्ष का बस है गली को मोड़ पर ही
आओ अगवानी करे, ले पृष्ठ कोरे साथ मन के

-जी...बहुत सुन्दर!!

फॉन्ट साईज बहुत छोटी हो गई है...

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