शिल्पकारों का सपना संजीवित हुआ एक ही मूर्त्ति में ज्यों संवरने लगा
चित्रकारों का हर रंग छू कूचियां, एक ही चित्र में ज्यों निखरने लगा
फागुनी फाग,सावन की मल्हार मिल कार्तिकी पूर्णिमा को लगा कर गले
आपके रूप की धूप में चाँदनी का नया ही कोई चित्र बनने लगा
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नव वर्ष २०२४
नववर्ष 2024 दो हज़ार चौबीस वर्ष की नई भोर का स्वागत करने खोल रही है निशा खिड़कियाँ प्राची की अब धीरे धीरे अगवानी का थाल सजाकर चंदन डीप जला...
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प्यार के गीतों को सोच रहा हूँ आख़िर कब तक लिखूँ प्यार के इन गीतों को ये गुलाब चंपा और जूही, बेला गेंदा सब मुरझाये कचनारों के फूलों पर भी च...
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परिभाषा उस एक निमिष की खोज रहा हूँ जिस पल तुमने होठों से न कहते कहते आँखों से मुझको हाँ की थी वह पल जब शाकुन्तल सपने, सँवरे थे दुष्यन्त नयन ...
2 comments:
"फागुनी फाग,सावन की मल्हार मिल कार्तिकी पूर्णिमा को लगा कर गले"
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सुन्दर !!
بنشر متنقل
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