मातृ दिवस

उम्र की राह में हर किसी मोड़ पर नाम तेरा ही है पंथ दीपित करें
तेरे आशीष की बदलियाँ घिर घनी जेठ का ताप  भी पल में शीतल करे 
नाम का तेरे पारस पारस कर रहा शूल बिखरे हुए, फूल की पांखुरी 
शब्द सारे ही क्षमतारहित रह गए तेरा गुणगान जो तूल  भर भी करें 

1 comment:

Udan Tashtari said...

क्या बात है

सूर्य फिर करने लगा है

रंग अरुणाई हुआ है सुरमये प्राची क्षितिज का रोशनी की दस्तकें सुन रात के डूबे सितारे राह ने भेजा निमंत्रण इक नई मंज़िल बनाकर नीड तत्प...