खबरें वही पुरानी

खबरें वही पुरानी लेकर आया है अखबार
सभी जानते किन्तु न करता कोई भी स्वीकार
 
वोही किस्सा भारत में सब करें चापलूसी
झूठी करें प्रशंसा बरतें तनिक न कंजूसी
लेकर एक कटोरा माँगें द्वारे द्वारे"वाह"
देख दूसरों की करते हैं अपने मेन में डाह
 
खुद ही अपनी पीठ ठोकते आये हैं हर बार
 वही पुरानी लेकर आया है अखबार
 
चार बटोरे अक्षर कहते हैं खुद को ज्ञानी
कहते वेद रचयिता हैं वो इतने अभिमानी
खुद का लिखा खुदा न समझे,पथ के अनुयायी
बिखराते हर एक क्षेत्र में ये केवल स्याही
 
देख दुराग्रह इनका सारे तर्क गये हैं हार
खबरें वही पुरानी लेकर आया है अखबार
 
अपना खेमा अपना भौंपू ये लेकर चलते
कोई आगे बढ़े तनिक तो तन मन हैं जलते
सारे ग्रन्थ होंठ पर इनके आकर हैं रुकते
ये खजूर के पेड़ सरीखे नहीं जरा झुकते
 
दंभ सदा ही रहता आया सिर पर हुआ सवार
 खबरें वही पुरानी लेकर आया है अखबार

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

पढ़ कर हो जाते बीमार,
खबर भरी वो ही अखबार।

शिवम् मिश्रा said...

बहुत खूब ... सादर !

कौन करेगा नमक का हक़ अदा - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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