लिखे हैं गीत मैने भावना को शब्द में बोकर
लिखे हैं अस्मिता को हर सिरजते छन्द में खोकर
लिखे हैं कल्पना के पक्षियों के पंख पर मैने
लिखे हैं वेदना की गठरियों को शीश पर ढोकर
मगर जो आज लिखता हूँ नहीं है गीत वह मेरा
तुम्हारी प्रीत को बस शब्द में मैं ढाल लाया हूँ
रंगा जिस प्रीत ने पग में तुम्हारे आलता आकर
कपोलों पर अचानक लाज की रेखायें खींची थी
अँजी थी काजरी रेखायें बन कर, जो नयन में आ
कि जिसने गंध बन कर साँस की अँगनाई सींची थी
उमगती प्रीत की उस इन्द्रधनुषी आभ को अपने
पिरोकर छन्द में दो पल जरा सा गुनगुनाया हूँ
किया जिस प्रीत ने कर के तुम्हारे स्पर्श को,पारस
नयन की क्यारियों में स्वप्न के पौधे उगाये हैं
उंड़ेले हैं बहारों के कलश, मन की गली में आ
सँवर कर ताल में, घुंघरू पगों के झनझनाये हैं
उसी इक प्रीत की उठती तरंगों ने छुआ मुझको
लगा है आज मैं बरसात में उसकी नहाया हूँ
पलक अपनी उठा कर जो कहा तुमने बिना बोले
बताया उंगलियों के पोर ने मुझको जरा छूकर
अधर के थरथराते मौन शब्दों को उठाकर के
लिखा था पांव के नख से कोई सन्देश जो भू पर
उसी सन्देश में मैने डुबोई लेखनी अपनी
निखर कर आ गया जो सामने, वो बीन लाया हूँ
Monday, May 03, 2010
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9 comments:
रंगा जिस प्रीत ने पग में तुम्हारे आलता आकर
कपोलों पर अचानक लाज की रेखायें खींची थी
अँजी थी काजरी रेखायें बन कर, जो नयन में आ
कि जिसने गंध बन कर साँस की अँगनाई सींची थी
-कुछ शब्द ही नहीं सिवाय...अद्भुत कहने के...गजब- अँजी थी काजरी रेखायें!!
क्या खूब कहा...हर लाइन बेजोड़....राकेश जी धन्यवाद
पलक अपनी उठा कर जो कहा तुमने बिना बोले
बताया उंगलियों के पोर ने मुझको जरा छूकर
अधर के थरथराते मौन शब्दों को उठाकर के
लिखा था पांव के नख से कोई सन्देश जो भू पर
BAHUT KHUB
BADHAI AAP KO IS KE LIYE
राकेश जी अनोखी बात है
किया जिस प्रीत ने कर के तुम्हारे स्पर्श को,पारस
नयन की क्यारियों में स्वप्न के पौधे उगाये हैं
उंड़ेले हैं बहारों के कलश, मन की गली में आ
सँवर कर ताल में, घुंघरू पगों के झनझनाये हैं
लिखे हैं गीत मैने भावना को शब्द में बोकर
लिखे हैं अस्मिता को हर सिरजते छन्द में खोकर
लिखे हैं कल्पना के पक्षियों के पंख पर मैने
लिखे हैं वेदना की गठरियों को शीश पर ढोकर
मगर जो आज लिखता हूँ नहीं है गीत वह मेरा
तुम्हारी प्रीत को बस शब्द में मैं ढाल लाया हूँ
जरा सा गुनगुनाया हूँ...
बहुत सुन्दर!!
Aap Feedburner add kar le, Google redaer ya direct email se padhne me suvidha hogi.
वाह्………क्या खूब भावों को पिरोया है………………गज़ब का लेखन्।
अद्भुत है कविवर !!
भावमयी रचना शब्दों को बखूबी पिरोया है ।
बहुत खूबसूरत गीत...
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