चांदनी ओढ़ कर चांदनी रात में आप आये तो परछइयां धुल गई
आपके पाँव की झान्झारों से गिरी जो खनक ,मोतियों में वही ढल गई
भोर की वे किरण दिन पे ताला लगा,थी डगर पर गई सांझ की घूमने
आपको देखने की उमंगें संजो,रात की वे बनी खिड़कियाँ खुल गई
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxn
भोजपत्रों पे लिक्खे हुए मंत्र थे,ओस बन कर गिरे शतदली पत्र पर
शिव तपोभंग को एक उन्माद सा छा गया फिर निखरते हुए सत्र पर
विश्वामित्री तपस्याएँ खंडित हुई आपकी एक छवि जो गगन में बनी
आपका नाम बन सूर्य की रश्मियाँ हो गई दीप्तिमय आज सर्वत्र पर
4 comments:
nice poem i love to read this......
Christmas flowers
सौन्दर्यपूर्ण अभिव्यक्ति।
सौन्द्र्य रस से परिपूर्ण रचना। आपको सारस्वत सम्मान मिलने के लिये एडवांस मे बधाई ।
really very nice and impressive i love to read this..........
flowers for Valentine
Post a Comment