माँ शारदा के चरणों में सादर नमन

श्वेत पत्रों से पंकज के फिसली हुई ओस की बूँद ढल स्याहियों में गई
बीन के तार के कम्पनों से छिटक एक सरगम आ सहसा कलम बन गई
फिर वरद हस्त आशीष बन उठ गया बारिशें अक्षरों की निरंतर हुईं
शब्द की छंद की माल पिरती हुई आप ही आप आ गीत तब बन गई.

माँ  शारदा के चरणों में सादर नमन

Comments

Shar said…
:)
शुभप्रभात, शारदा पुत्र राकेश !!
ओस में धुले इन शब्दों को प्रणाम !
Udan Tashtari said…
हमारा नमन भी पहुँचें...


बीन के तार?? ये बिम्ब...
आपकी बात ही निराली है राकेश भाई - गागर मे सागर।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
रंजना said…
Maa vinapani ko shat shat naman !!!
Shardula said…
This comment has been removed by the author.

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