श्वेत पत्रों से पंकज के फिसली हुई ओस की बूँद ढल स्याहियों में गई
बीन के तार के कम्पनों से छिटक एक सरगम आ सहसा कलम बन गई
फिर वरद हस्त आशीष बन उठ गया बारिशें अक्षरों की निरंतर हुईं
शब्द की छंद की माल पिरती हुई आप ही आप आ गीत तब बन गई.
माँ शारदा के चरणों में सादर नमन
Thursday, January 21, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)



7 comments:
:)
शुभप्रभात, शारदा पुत्र राकेश !!
ओस में धुले इन शब्दों को प्रणाम !
हमारा नमन भी पहुँचें...
बीन के तार?? ये बिम्ब...
आपकी बात ही निराली है राकेश भाई - गागर मे सागर।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
Maa vinapani ko shat shat naman !!!
सादर नमन!!!
Post a Comment