tag:blogger.com,1999:blog-15125972.post5024460719251141446..comments2008-01-22T10:19:15.798+05:30Comments on गीत कलश: लेकिन संबोधन परराकेश खंडेलवालhttp://www.blogger.com/profile/08112419047015083219noreply@blogger.comBlogger6125tag:blogger.com,1999:blog-15125972.post-22273770020885520262008-01-22T10:19:00.000+05:302008-01-22T10:19:00.000+05:30मधुर सरगमे ! एक नाम से सम्बोधित कर सकूँ असंभवएक फू...मधुर सरगमे ! एक नाम से सम्बोधित कर सकूँ असंभव<BR/>एक फूल में नहीं समाहित होती गंध भरी फुलवारी<BR/>आप ने ऐसी रचना लिख डाली है की प्रशंशा के लिए शब्दों का अभाव महसूस हो रहा है. बहुत बहुत बहुत सुंदर.<BR/>नीरजनीरज गोस्वामीhttp://www.blogger.com/profile/07783169049273015154noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15125972.post-17337486013272525982008-01-21T04:39:00.000+05:302008-01-21T04:39:00.000+05:30रंजूजी,मीतजी, घुघुतीजी तथा मनीषजीआपके प्रोत्साहन ए...रंजूजी,मीतजी, घुघुतीजी तथा मनीषजी<BR/><BR/>आपके प्रोत्साहन एवं स्नेहिल शब्दों के लिये आभारी हूँ.<BR/><BR/>राकेशराकेश खंडेलवालhttp://www.blogger.com/profile/08112419047015083219noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15125972.post-45530493289503728972008-01-21T00:20:00.000+05:302008-01-21T00:20:00.000+05:30बहुत बढ़िया - खासकर " चित्रलिखित हैं नयन और वाणी ह...बहुत बढ़िया - खासकर " चित्रलिखित हैं नयन और वाणी हो जाती है पाषाणी/ तब भावों की अभिव्यक्ति को, किस सांचे में कहो उतारूँ" - उत्तम प्रेम पत्र - मनीषजोशिमhttp://www.blogger.com/profile/08624620626295874696noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15125972.post-90337473572681223722008-01-19T04:55:00.000+05:302008-01-19T04:55:00.000+05:30आपकी रचना पढ़ आश्चर्यचकित रह गई । बहुत सुन्दर भाषा ...आपकी रचना पढ़ आश्चर्यचकित रह गई । बहुत सुन्दर भाषा , बहुत सुन्दर भाव ! लगता है जैसे कोई किसी बहुत ही पुरातन काल में ले गया , जब नारी को ये सब उपमाएँ दी जाती थीं। शायद कालीदास के युग में! <BR/>घुघूती बासूतीMired Miragehttp://www.blogger.com/profile/06098260346298529829noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15125972.post-30810254697053463822008-01-18T15:33:00.000+05:302008-01-18T15:33:00.000+05:30राकेश जी, कमाल की रचना है. विचार, भाव, भाषा, प्र...राकेश जी, कमाल की रचना है. विचार, भाव, भाषा, प्रस्तुति - सब कुछ एकदम कमाल का - बिल्कुल कसा हुआ. बहुत ही अच्छा, बधाई स्वीकारें.मीतhttp://www.blogger.com/profile/06968972033134794094noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-15125972.post-85377093417502433632008-01-18T09:23:00.000+05:302008-01-18T09:23:00.000+05:30बहुत सुंदर ..कविता .भाव दिल को छू गए इस के !बहुत सुंदर ..कविता .भाव दिल को छू गए इस के !रंजूhttp://www.blogger.com/profile/07700299203001955054noreply@blogger.com