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Showing posts from January, 2016

एक पृष्ठ कुछ मुड़ा हुआ है

तुम्हें भेंट में दी जो पुस्तक उसे खोल कर जब देखोगे
पाओगे तब कहीं मध्य में एक पृष्ठ कुछ मुड़ा  हुआ है
उस पुस्तक के पन्नों में हैं अंकित युग की प्रेम कथाएं
जगन्नाथ के सAथ लवंगी, बाजीराव और मस्तानी
रांझा हीर कैसे लैला के साथ साथ नल औ दमयंती
और उर्वशी से पुरुरवा के रिश्ते की प्रीति कहानी
शायद तुम लिखना चाहोगे इक परिशिष्ट उसी पुस्तज में
उस रिश्ते का हम दोनों के मध्य कहीं जो जुड़ा हुआ है
मुड़ा हुआ वह एक पृष्ठ है बन कर तीर जहां संधानित
वहां हमारे संबंधो की तकली कात रही है धागे
जन्म जन्म के एक सूत्र की मिल कर जोड़ रहे वो डोरी
अभिमंत्रित हों लेख भाग्य के वही कहीं नींदों सेजागे 
शिलालवख बन जुड़ा  हुआ हर एक कथानक उस पुस्तक में
जो की व्यस्तता के गतिक्रम में सुधियों में गुड़मुड़ा हुआ है 
कोरे पन्नों में उभरेगा कल इतिहास बना सोन हरा
जहाँ आज के पल पर होंगे हस्ताक्षर ओ मीट तुम्हारे
दिशाबोध बन जाएंगे वे आगत में हर असमंजस को
कभी अगर रसमय सुधियों पर घिरे संशयों के अंधियारे
हो लेगा विश्वास प्रीत का एक बार फिर से चट्टानी
कृत्रिमता में उलझ उलझ जो अभ्रक सा भुडभुडा  हुआ है 

कैनवास था टँगा फ़्रेम में

एक किसी रससिक्त छन्द की अनबूझी तलाश में निशिदिनरहे खोलते द्वार जालघर पर जाकर सँकरी गलियों के
चारों ओर झाड़ झंखाड़ोंसे भरपूर मिले बीहड़ वननभ से थल तक बिछी हुई थीबस विषकी उच्छृंखल बेलेंअन्तहीन आमंत्रण आकर देते थे आवाज़ बिन रुकेउन्हें सराहें और सहेजने को अपनी सुधियों में ले लें
जितनी बार ढूँढने चाहे मार्ग दूर इनके व्यूहों सेउतनी बार बढ़े हैं घेरे कुछ कलुषित सी प्रवृत्तियों के
बढ़ता कोलाहल पी लेता भावुकता के जल तरंग स्वरमन की रीती गागर रीती, हर पनघट ने लौटा दी हैदूर क्षितिज तक कैनवास तो तना हुआ है टँगा फ़्रेम मेंलेकिन प्रिज़्मों ने किरणों की आवेदनता ठुकरा दी है
आड़ी तिरछी रेखाओं को मानचित्र कह कर तलाशतेवे रस्ते जो गुम हो बैठे, साहित्यिक बारादरियों के
होती थीं जब अनायास ही गीतों में निमग्न संध्याएंपोटोमक के तट परगाया करती कोई सजल रागिनीउसकी कोमल छुअन आजभी आ सुधियोंको सिहराती हैंमन होता आतुर है भर ले खुली बांह में झरी चांदनी
पर अब कृत्रिमता में ढूँढ़ें

किसकी प्यास बुझाए बादल

तुमने मुझे बताया था कल, सारी धरा यहां है प्यासीफिर दो बूँद नीर की लेकर, किसकी प्यास बुझाए बादल चारों ओर अबुझ प्यासों के सीमाहीन मरुस्थल फ़ैलेएक नई तृष्णा बोता है उगता हुआ दिवस आ आ करउलझे हुये नये व्यूहों में नित नित बढ़ती है अकुलाहटफ़ैला करते पांव, सिमटती जाती हैं पल पल पर चादर
बढ़ती हुई शुष्कताओं से घिर कर रक्तिम ही रहता हैवो प्राची हो या कि प्रतीची तक फैला नभ का नीलांचल 
उदयाचल के पनघट पर भी उगती रही प्यास निशि वासरअस्ताचल के सूने तट  पर आस लगाए आतुर नैना घाटी की सूनी  पगडण्डी ढूंढे  मरू ओढ़े नदिया को सब मरीचिकाओं में उलझे , खोते रहे हृपास का चैना  

तपती हुई जेठ की गर्मी या सावन का श्यामल अम्बरइस नगरी में हर कोई प्यासा, किसकी प्यास बुझाए बादल 
प्यादे की हर घड़ी प्यास है, वो वज़ीर के पद तक पहुंचेमंत्रा की है प्यास निरंतर कैसे वह राजा बन जाएप्यासी बतखें मोती  चुगना चाहें राजहंस के जैसेकव्वे की तृष्णा है कैसे कोयल का सुर लेकर गाये
है बबूल को प्यास पुज  सके किसी तरह बरगद के जैसातालाबों का नीर चाहता, भरे आंजुरी हो गंगाजल
ये नया  वर्ष आकर हमें कह रहा आज हम कुछ नई कामनाएं करें
प्रीत अभिमंत्रिता हम सुधाएं लिए आज हर इक खुली आंजुरि को भरें
हर बरस जो बिखर खंडहर हो गई आस के सारे अवशेष चुनते हुए
अपने संकल्प नूतन सजाते हुए कोई निर्माण नूतन सभी मिल करें
कामना इस वरस धर्म के नाम पर
कोई भी और अब ना नृशंसी बने
सोच संदूकची में सिमट न रहे
हर बशर वासुधैकं कुटुम्बी बने
अपने घर से जड़ों से न उजड़े कोई
हर शर देश हर एक परिवार हो
कोई दीवार खिंच ना सके अब कहीं
हर गली गाँव पूरा खुला द्वार हो
सीरिया में अमन के कबूतर उड़ें
कोई अब और शरणार्थी न बने
हो वो पेरिस या हो सेन बरनारडिनो
या कि माली न दुहराये जायें कभी
एक अम्बर की चादर की छाया तले
एक मंज़िल के पथ पर चलें मिल सभी
गिरजे मंदिर में मस्जिद सिनेगॉग में
लेश भर भी नहीं मन मुटावा बढे
एक ही पाठ हो एक सन्देश हो
चाहे भाषा कोई भी लिखें या पढ़े
धर्म की आड़ ले और खुद्गर्जियां
इस बरस अपने उल्लू न सीधे करें
इस नए वर्ष में कुछ नई सोच हो
कामनाएं मेरी नव हों, हों आप की
पूर्ण जगती में बढ़ जाए सद्भावना
संतुलन में रहे विश्व का ताप भी
हर दिवस ले के आये नई रौशनी
हर घिरी रात नूतन सपन आंज ले
दिन की तख्ती लिखे नित कथानक नए
और होकर मु…
इस नये वर्ष की नव उदित चाँदनी, आपके नैन में स्वप्न आँजे नये
उद्यमों की उगी भोर अँगनाई में आ भरे आपकी, स्वर्ण से अल्पना
दिन ढले सांझ श्रून्गार करती हुई,, बन के शामे अवध मुस्कुराती रहे
यह नया वर्ष पूरी करे कामना, आपने जिन की की हो कभी कल्पना.