फगुनाइ गंध हवा में है

बासंती चूनर लहराई फागुन का रंग हवा में है
मौसम की चाल निखर आई फगुनाइ गंध हवा में है

गुनगुनी हो गई घूप परस ले गर्म चाय की प्याली का
फेंका उतार कर श्वेत, लपेटे दूब रंग हरियाली का
महीनो के बाद बगीचे में आकर कोई पाखी बोला
घर भर ने ताजा साँसे ली कमरों ने खिड़की को खोला

ली भावों ने फिर अंगड़ाई, फगुनाइ गंध हवा में है
कोंपल ने आँखे खोल कहा फगुन का रंग   हवा में है

पारा तलघर से सीढ़ी चढ़ ऊपर की मंज़िल तक आया
फिर चंग कहीं पर बोल उठा,बम लहरी का स्वर लहराया
खलिहानों के प्रांगण  में अब सोनाहली चूनर लहराई
नदिया के बहते धारे ने तट पर आ छेड़ी शहनाई 

तितली फूलों पर मंडराए, फगुनाई  गंध हवा में है
बालें फ़सलों  की लहराई फ़ागुन का रंग  हवा में है 

तन लगा तोड़ने अंगड़ाई मचले  पग चहलकदमियों को
होलिका दहन की तैयारी के चिह्न सजाते गलियों को
टेसू के फूल लगे रंगने नव पीत रक्त रंगों में दिन
अम्बर यह बादल से बोला, अब घर जा आया है फागुन

गीतों ने नई गज़ल गाई फगुनाई गंध हवा में है
मौसम ने पायल थिरकाई फ़ागुन का रंग  हवा में है

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