प्रश्न करने लग गई निशिगन्ध

जब तुम्हारे कुन्तलों की वेणियों में फूल महके
प्रश्न करने लग गई निशिगन्ध उस पल मलयजों से
मोगरा गेंदा, चमेली, कौमुदी, कचनार जूही
और हरसिंगार के संग हो गुलाबों की महक भी
गुलमुहर की प्राथमिक अंगड़ाईयों से अधिक मोहक
कौन सी यह गंध, मनमोहक सुवासों से परे भी
दूब पत्ते लहर झरने  सब अधीरा उत्तरों को
कौन है उत्प्रेरणा बनता निरन्तर हलचलों पे
उम्र के कस्तूरिया पल दृष्टि अपनी है झुकाये
षोडसी दृग में बने पहले सपन ने आंख खोली
थरथराहट प्रथम चुम्बन की अपेक्षा में अधर की
थी ख्गिंची रक्तिम कपोलों पर प्रथम आ जो रंगोली

सब प्रतीक्षा ले खड़े हैं कोई तो संकेत आये
उद्गमों का जो पता दे मोहिनी इन कलकलों के
द्वार प्राची के लहरती चूनरी अरुणिं उषा की
चाँदनी का शाल ओढ़े दृष्टि कजरारी निशा की
सब लपेटे अचरजों को एक दूजे को निहारें
नववधू की उंगलियों पर नृत्यमय होती हिना भी

पूछते सब खोलता है कौन यह अध्याय नूतन
और लिखता नाम अपना देवपुर की सरगमों पे

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