रीत गये हैं शब्द कोश के सारे शब्द आज लगता है
करे रूप से न्याय तुम्हारे, ऐसा एक नहीं है बाकी
फूल, पांखुरी,भंवरे तितली, रंग लुटाती केसर क्यारी
चम्पा, जूही, रजनीगंधा, गंधों में डूबी फुलवारी
नदिया लहरें तट का गुंजन और तरंगित झरता झरना
निंदिया रातें सपने बोता सा कलियों का एक बिछौना
इंगित तो कुछ कर देते हैं, विवरण देने में पर अक्षम
तुमसे नजरें मिली जरा सा तो सबने ही बगलें झांकी
चन्दन धूप अगरबत्ती से हुए सुवासित पवन झकोरे
खस गुलाब फूले बेला संग भरे केवड़े रखे सकोरे
कदली खंभे चूनर की छत रखे हुए कलशों की गूँजें
मंत्रों की ध्वनि अर्थ प्राप्त करने को फिर शब्दों को ढूँढें
महानदों के जल से पूरित अभिषेकों के मुदित हुए घट
फ़लीभूत हो गये भाग्य जो संभव हुआ अर्चना आ की
कुंकुम बिंदिया, मेंहदी महावर लेप वेणियाँ महका गजरा
आकाशी नयनों के क्षितिजों पर बन घटा सँवरता कजरा
पायल बिछुआ तगड़ी कंगन, झूमर नथनी बाली लटकन
हथफूलों से जुड़ी मुद्रिका,टीके से लड़ियों का संगम
अर्थहीन हो रह जाते हैं हुए नहीं संयुक्त अगर जो
पाते रहे अर्थ तुमसे ही चूम तुम्हारी छवि इक बाँकी
Thursday, June 10, 2010
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6 comments:
अर्थहीन हो रह जाते हैं हुए नहीं संयुक्त अगर जो
पाते रहे अर्थ तुमसे ही चूम तुम्हारी छवि इक बाँकी
बहुत बढ़िया...शब्दों और भावों का बेजोड़ संगम...लाज़वाब गीत...धन्यवाद राकेश जी
पाते रहे अर्थ तुमसे ही चूम तुम्हारी छवि इक बाँकी
-जबरदस्त भाई जी..आनन्द आ गया!
पाते रहे अर्थ तुमसे ही चूम तुम्हारी छवि इक बाँकी
सुन्दरतम! आपकी रचनाएं मुझे संबल देती हैं ...
पाते रहे अर्थ तुमसे ही चूम तुम्हारी छवि इक बाँकी
bahut umda
http://sanjaykuamr.blogspot.com/
bahut hi sundar geet bahut khoob sir aapse hamesha seekhne ko milta hai
वाह वाह
प्रस्तुति...प्रस्तुतिकरण के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
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