सोच रहे हैं तुम कह दो

सोच रहे हैं तुम कह दो तो कोई गीत लिखें
और तुम्हें हम नहीं अपैरिचित, अपना मीत लिखें

लिखती नाम फूल की पांखुर पर रोजाना शबनम
जमना तट की रेती पर लिखता रहता है मधुबन
हम भी करते हुए अनुसरण ये ही रीत, लिखें

लिखता चन्दन पुरबाई के आँचल पर गन्धें
लहरें लिखतीं गंगा के तट पर आ सौगन्धें
तुम जो कह दो अनुबन्धों में लिपटी प्रीत लिखें

लिखती भोर धूप से लेकर किरणों की स्याही
कोयल स्वर की कूची लेकर रँगती अमराई
हम भी राधा की पायल से ले संगीत लिखें

सोच रहे हैं तुम कह दो तो...............................

Comments

Shar said…
:)
S R said…
as always beautifully refreshing
M VERMA said…
लिखती नाम फूल की पांखुर पर रोजाना शबनम
जमना तट की रेती पर लिखता रहता है मधुबन
क्या शब्द चित्र खीचा है
"अर्श" said…
aapke lekhani ke baare me kuchh kahunga to suraj ko diyaa dikhaane waali hogi ... puri rachanaa mukammal... hameshaa ki tarah... bas salaam aapko aur aapki lekhani ko..



arsh
Udan Tashtari said…
लिखता चन्दन पुरबाई के आँचल पर गन्धें
लहरें लिखतीं गंगा के तट पर आ सौगन्धें
तुम जो कह दो अनुबन्धों में लिपटी प्रीत लिखें


-आप तो बस लिखते चलें..क्या बार बार कहना -हम तो गुनगुनाते चलेंगे साथ साथ.
रंजना said…
Waah ! Waah ! Waah !!! aanad ras saagar me aakanth nimagn ho gaya man....Waah !!! Kavy me aapka bimb prayog mugdh kar diya karta hai...
Dr. Amar Jyoti said…
हमेशा की तरह अनुपम।
Shardula said…
अब पूछते ही रहेंगे कि गीत भी देंगे :) :)
Shardula said…
Now jokes apart . . . really I am amazed how are you able to write such beautiful lines even when they are just supposed to ask, "shall I write a song for you!"
See, half the readers are already swooning... and the song has not yet begun!
You are really the ultimate!!
Will write about the song in lunch time! Bye!
Shardula said…
"कोयल स्वर की कूची लेकर रँगती अमराई"
ये सुनते ही कोयल खुश हो गयी है!! कह रही है उसे नहीं पता था कि आप उसके रंगे चित्र देख पाते हैं :) :)
हाँ सच, ये एकदम नया बिम्ब है!

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