संकल्प

फूल की पांखुरी और अक्षत लिये, मैने संकल्प का जल भरा हाथ में
आपका ध्यान हर पल रहे साथ में,भोर में सांझ में, दोपहर,रात में
स्वप्न की वीथिकाओं में बस आपके चित्र दीवार पर मुस्कुराते रहें
आप मौसम की परछाईं बन कर रहें, ग्रीष्म में, शीत में और बरसात में

Comments

Udan Tashtari said…
बहुत सुंदर मुक्तक है.
Anonymous said…
आप जैसे श्रेष्ठ कवि की कविताओं पर टिप्पणी करने का साहस नहीं जुटा पाता हूं। मेरे शब्दों में शायद इतना वज़न नहीं है कि आपकी कविताओं पर टिप्पणी करने का दुस्साहस कर सकूं।

तुम्हारी हंसी की फुरेरी बना कर साथ लाया था
वो शायद अत्र बन कर फ़िज़ा में घुल रही होगी
तभी सभी के चेहरों पर आज हंसी दिखती है।

****

आंगन में आज चांदनी की अजब सी रौनक है
उंगलियों में तुम्हारी बिछिया भी नहीं दिखती!
समीर भाइ- धन्यवाद

अनुराग जी- आपके ख्याल सुन्दर हैं
राकेश जी:
सुन्दर मुक्तक है।
....

होठों पे मेरे कहानी तुम्हारी है
सपनों में डूबी निशानी तुम्हारी है
बचपन,बुढापा तुम्हें को समर्पित है
सारी की सारी जवानी तुम्हारी है ।

सादर
अनूप

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